Tuesday, 30 June 2015

औरत

कुछ ज़हनी अपाहिज ऐसे लोग भी हैं जिन लोगों ने औरत को एक कमज़ोर कमतर और अपनी राहत का समान समझ रखा है, शायद ऐसी सोच वो अपनी माँ बहनों‬ के लिये भी रखते हों,

मैं एक कमतर हकीर सा बंदा" औरत कि इज्‍ज़त, हुरमत, और रहमत पर क्‍या लिख सकता हूँ? जिसकी हुरमत कि मिसालें क़ुरआन देता हो, बस दो लफ्‍ज़ उन जवाँ मर्दोँ को कहूँगा, कि आपने कभी कोई ऐसी मिसाल नहीं बनाई, जिसकी तारीख़ लिखी गई हो, और आप जैसों के रवैइये गली गली जग ज़ाहिर मिलेंगे, जो घर परिवार की ज़िम्‍मेदारी निभाना तो दूर, कभी अपने घर वालों, माँ-बहनों, को देख कर एक मुस्‍कुराहट का नज़राना दे कर भी उनको तस्‍कीन बख्‍शी हो, मगर मैं हर पाकबाज़ औरत के लिये ये गवाही ज़रूर दूँगा, कि औरत के पास वो सलाहियत है कि वो हालात का तक़ाज़ा पूरा करने के लिए वालदैन का बेटा, और औलाद की बाप, बन सकती है। जो सलाहियत आप के ज़हन से भी नहीं गुज़र सकती, और जो मेरे भाई इस शान के लायक हैं, उनकी ज़ुबान ऐसी अहमक़ाना बकवास से दूर रहती है।।

दुनिया की सबसे बड़ी अफ़तारी

दुनिया की सबसे बड़ी अफ़तारी ख़ान-ए-काबा में होती है। यहाँ अफ़तारी के लिए बिछाए जाने वाले दसतरख़ान की लम्बाई 12 किलोमीटर होती है। यह तवाफ़ की जगह बिछाया जाता है । इस पर रोज़ाना 12 लाख रोज़ेदार अफ़तारी करते हैं। जिस पर रोज़ाना 10 लाख सऊदी रियाल ख़र्च होता है। अफ़तार के दौरान रोज़ादारों को रोज़ाना 50 लाख खजूरें और 20 लाख आबे ज़मज़म की बोतलें फ़राहम की जाती हैं। इसके अलावा जूस, दूध, और केक से भी तवाज़ो की जाती है। यह दुनिया की सबसे बड़ी अफ़तारी 10 मिनट में समेट ली जाती है और फ़र्श धो कर साफ़ कर लिया जाता है।।